कैलाश की ओर पाण्डव स्वर्ग मार्ग से - 20.07.2008 श्रावण बदी 2 रविवार

घुमावदार घाटी एवं पहाड़ी रास्ते में लगभग 3 घण्टा यात्रा के बाद कुमाऊ मंडल विकास निगम के रास्तें में पड़ने वाले गेस्ट हाऊस के पास जाकर बस रूकी। वहां पर यात्रियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई थी। सभी यात्रियो ने अपने-अपने पंसद के अनुरूप शुध्द शाकाहारी जलपान ग्रहण किये। बस रूकते ही स्थानीय बच्चे भी उत्सुकतावश वहां पर आ गए। यात्रीगण पहाड़ी वातावरण में हल्की ठण्ड में अपने आपको ढालने की कोशिश करते हुए कुछ चहल कदमी करते रहे। बड़ा ही मनोरम दृश्य होने पर प्राय: सभी यात्री अपने-अपने कैमरे का उपयोग किया। लगभग 10 बजे पुन: हम लोग गन्तव्य की ओर रवाना हुए। पूरा रास्ता सकरी घाटी एवं घुमावदार होने तथा निरंतर चढ़ाई वाला होने से सफर में बहुत ही आंनन्द आ रहा था।

रास्ते में छोटे-छोटे पहाड़ी गांव पार करते हुए हम लोगों की बस अपेक्षाकृत बडे शहर से होकर गुजरी जिसका नाम पिथौरागढ़ है। यह उत्तराखंड का एक जिला मुख्यालय है यहां सभी सुविधा होने का अनुमान लगा। साथ ही सेना के बेस कैम्प (हैलिपेड सहित) भी दिखा। यहां से बस में डीजल लेकर पुन: रवाना हुए। बस में हमारे साथ चल रहे कुमाऊ मण्डल विकास निगम के गाईड के द्वारा कुछ दूर और आगे जाने के बाद बस रूकवायी गयी, सभी यात्री बस से नीचे उतर गए।
पहाड़ी के नीचे कुछ ही दूर में दो नदियों का संगम एवं वहां एक छोटा सा मंदिर दिखाई दे रहा था जिसे गाईड द्वारा बताया गया कि एक नदी का नाम ''सरयू'' है तथा दूसरी नदी का नाम ''रामगंगा'' है। संगम के आगे जाकर यह नदी ''काली नदी'' में जाकर मिल जाती है, जो और आगे जाकर अयोध्या में ''सरयू नदी'' कहलाती है। थोडी देर बाद हम लोग पुन: रवाना हुए। लगभग दोपहर 1.00 बजे पहाडी में स्थित छोटा शहर चाकौरी पंहुचे। शहर से लगे हुए इण्डो तिब्बत बार्डर पुलिस के कैम्प में हमारी बस दाखिल हुई कैम्प के अंदर जाकर चौराहे जैसे स्थान में रूकी। वहाँ पर इण्डो-तिब्बत बार्डर पुलिस (ITBP) के जवान स्थानीय लोकवाद्य सहित हमारे स्वागत के लिए तैयार खड़े थे।
बस से उतरते ही हम सबका ''ओम नम: शिवाय'' उच्चारित कर स्वागत किया गया। आगे आगे ग्रामीण लोक वाद्य कलाकार बजाते हुए जा रहे थे हम उनके पीछे-पीछे कुछ दूर चले। यह ITBP का मिरथी बेस कैम्प है यहां से सुरक्षा जवानों का पहला कैम्प प्रारंभ होता है। कैम्प कमान्डेंट ने हम सबका पुष्पाहार से स्वागत किया। तत्पश्चात समूह फोटोग्राफी हुई। तदुपरांत हमें एक बडे से भवन में ले जाया गया जहां हमारे लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था उनके द्वारा की गयी थी। सभी यात्रियों ने दोपहर का सुस्वादु भोजन ग्रहण किया (रोटी, चांवल दाल, सब्जी, अचार, पापड़, सलाद, मीठा) । भोजन उपरांत सभी यात्री हॉल में बैठे जहां पर हमें कमाण्डेंट द्वारा आगे के दुर्गम पहाड़ी रास्ते मौसम, जलवायु, ठण्ड तथा इन सबके लिए सावधानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
दुर्गम पहाड़ी पैदल रास्ते से होने वाले थकान तथा उसे दूर करने के उपाय के तरीके बताए गए। यह भी बताया गया कि जिस रास्ते से होकर हमारी कैलाश मानसरोवर परिक्रमा सम्पन्न होने वाली है। वह रास्ता पूर्वजों, ऋषि मुनियों के द्वारा खोजा गया है। महाभारत युध्द के पश्चात पाण्डव भी स्वर्ग जाने के लिए इसी रास्ते से कैलाश की ओर गए थे।

भोजन एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त कर हम लोग मिरथी कैम्प से 2.30 बजे धारचुला के लिए रवाना हुए। कैम्प की ओर से हमें भेंट स्वरूप एक-एक पौधा हिमालय की तराई में रोपने हेतु दिया गया तथा साथ ही यह भी बताया गया कि तराई का व्यक्ति जिसे भारत सरकार द्वारा वृक्ष मित्र पुरस्कार दिया गया यही का निवासी है जिनके द्वारा एक करोड़ वृक्ष लगाया गया है। जिनके द्वारा रोपित पौधों की देखभाल भी नियमित रूपों से की जा रही है। लगभग सायं 5.00 बजे हम लोग धारचुला पहुंचे। धारचुला में कुमाऊ मण्डल विकास निगम के गेस्ट हाऊस में ही जाकर बस रूकी, सामान उतारा गया। सभी यात्रियों को रूकने के लिए कमरा एवं हॉल में स्थान बताया गया, हम लोग (श्री मस्कराजी, तनेजाजी एवं विक्रम) हॉल में आसपास रूके । सामान उतारने एवं व्यवस्थित करने के पश्चात् हमें चाय के साथ बिस्किट दिया गया। उसी समय बता दिया गया कि एक घंटे बाद मीटिंग होगी। प्राय: सभी यात्रियों ने शाम को स्नान किया एवं थकावट दूर की। धारचूला मे गेस्ट हाऊस के पास ही नीचे काली नदी बहती है जिसमें अत्यन्त तेज बहाव था।, नदी के उस पार वाले शहर का नाम भी धारचुला (दारचुला) ही है किन्तु वह नेपाल देश में आता है। नदी में हेंगिंग ब्रिज बना हुआ है। जिसमें से लोग बेखटके आना जाना करते हैं किन्तु हमें बताया गया कि शाम 7.00 बजे के बाद आना-जाना बंद कर दिया जाता है।

क्रमश : .......
डी.पी. तिवारी
जारी रहिये..अच्छा लग रहा है आपका यात्रा पढ़ना!
ReplyDeleteकरचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा .
ReplyDeleteश्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् .
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व .
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेवशम्भो ..
सुन्दर यात्रा संस्मरण।
ReplyDeleteबधाई!
Dear Shri Tiwari Ji,
ReplyDeleteAn inspirational Journey witten by you is really a praise worthy work.
from : APS Nimbadia(Commandant 7th Bn.) Merthi
Ph. : 09412092567, 09013447044
E-mail : nimbadia@yahoo.com
अति सुन्दर. में ये पूरी यात्रा वृतांत २ बार पढ़ चूका हू, अब तीसरी बार पढ़ रहा हू, मेरी कैलाश मानसरोवर जाने की हार्दिक इच्छा है. भगवान शंकर से प्राथना है मुझे अपनी शरण में आने का कम से कम एक बार तो अवश्य ही अवसर दें. हर हर महादेव
ReplyDeleteइंजी. पवन खत्री,
बीकानेर, राजस्थान.
facebook.com/pawankhatrii
प्रिय खत्री जी,
Deleteओम नमः शिवायः
में पिछले वर्ष २०१२ के ८ वे बेत्च में हो कर आया हूँ. आप भी अवश्य प्लान करो और जावीसुदर्शन न्याती
९४१३३५८१५० कोटा राजस्थान
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