पंद्रहवें दिन की यात्रा 02.08.2008 पवित्र मानसरोवर में स्‍नान :

02.08.2008 श्रावण सुदी 1 शनिवार


Photobucketसुबह 6.00 बजे उठा चाय पिया, पश्चात तैयार हुआ। आज नाश्ता में पोहा बना है, 7.00 बजे पोहा खाकर बोर्नबिटा पिया। यात्रियों के समुह ‘‘बी‘‘ जिस बस में मानसरोवर परिक्रमा पूर्णकर कैलाश परिक्रमा हेतु दरचन पहुंचेगी उसी बस से हमारा समुह ‘‘ए‘‘ मानसरोवर परिक्रमा हेतु रवाना होगा इसलिए कमरों से सभी यात्री अपना-अपना लगेज गेस्ट हाऊस के गेट के पास लाकर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच मैं पी.सी.ओ. आकर घर बात किया तथा मानसरोवर परिक्रमा हेतु रवाना होने की जानकारी दिया तथा यही जानकारी फोन पर श्री नरसिंह चन्द्राकर को भी दिया।

लगभग 9.00 बजे ग्रुप ‘‘बी‘‘ के यात्रियों को लेकर बस पहुंची दोनो समुह के यात्री एक दूसरे से मिलकर अपने-अपने यात्रा का अनुभव सुनाए। उनके द्वारा बस से सामान उतार लेने के बाद हम लोगों के द्वारा सामान बस में लादा गया, पश्चात ‘‘ओम नमः शिवाय‘‘ के उद्घोष के साथ हमारी बस रवाना हुई लगभग डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद हमारी बस एक छोटे से शहर में जाकर रूकी जिसका नाम 000 (होर) है। यहां के बाजार से आगे पड़ाव के लिए भोजन सामग्री एवं सब्जी वगैरह खरीदा गया। यहां के सड़क किनारे कुछ लोग बिलियर्ड खेल रहे थे। हम लोग घुमते हुए यहां के दुकान एवं उसमें बिकने वाले सामान तथा भाव का मुआयना कर रहे थे। यहां बताया गया कि निजी ट्रेव्हल एजेंसी के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आने वाले यात्री भारत से काठमाण्डू (नेपाल) तथा वहां से सड़क मार्ग से दरचन पहुंचते है। तब भी यह शहर ‘‘होर‘‘ रास्ते में पड़ता है ।
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काठमाण्डू से दरचन तक के सड़क का निर्माण कार्य चीनी सरकार द्वारा कराया जा रहा है। कही-कही पर डामरीकरण तथा कही-कही पर सीमेंटीकरण का कार्य प्रगति पर दिखाई दिया। होर में आवश्यक सामग्री खरीदने के पश्चात हम लोग पुनः बस द्वारा रवाना हुए, हमारी बस कुछ दूर जाने के बाद हमे मानसरोवर दिखाई देने लगा उसके बाद मानसरोवर के पास ही पहुंच गए, आगे रास्ता मानसरोवर के किनारे-किनारे ही गया है, जहां से हमारी बस गुजर रही थी दायें साईड में पास में मानसरोवर तथा दूर बायें तरफ ‘‘कैलाश‘‘ अभी भी दिखाई दे रहा था। और कुछ दूर जाने के बाद हमारी बस रूक गई हम सभी यात्री नीचे उतरे सड़क के किनारे ही बायी ओर बौद्धो के प्रार्थना स्थल ‘‘गोम्फा‘‘ है जहां अंदर जाकर दर्शन किए और सड़क के दायी ओर नीचे मानसरोवर के पास जाकर जल का स्पर्श, आचमन किया। पश्चात पुनः यात्रा प्रारंभ हुई। आगे के यात्रा में लगातार हमारी बस मानसरोवर के किनारे-किनारे ही जा रही थी रास्ता कच्चा एवं उबड़-खाबड़ है चारो तरफ हिमालय की पर्वत मालाएं है प्रायः सभी के शिखर हिमाच्छादित है।

Photobucketदोपहर लगभग हम लोग कुगु ;फनहनद्ध नामक स्थान पर पहुंचे यह स्थान दरचन से 127 कि.मी. दूरी एवं समुद्र सतह से 4500 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। हमारी बस मानसरोवर के किनारे बने गेस्ट हाऊसनुमा मकानों के पास जाकर रूकी वही पर मानसरोवर के निकट बौद्ध गोम्फा भी है। यात्रियों के रूकने की व्यवस्था चीन सरकार द्वारा यहां की गई है। प्रत्येक कमरे में 3-4 लकड़ी के तखत एवं उस पर गद्दे रजाई रखे हुए है। बस से सामान उतारकर एक कमरे में मैं, राजनारायण, रामशरण और राकेश जुनेजा अपना-अपना स्थान सुरक्षित किए। यहां पर कमरे दो लाईन में बनाए गए है। एक-एक लाईन में 6-6 कमरे है। दूसरे लाईन के कमरे की खिड़की से मानसरोवर दिखाई देता है, 9 कमरे में हम यात्री रूके व एक कमरे में बस ड्रायवर एवं गाईड रूके शेष दो कमरे गेस्ट हाऊस के इन्चार्ज अधिकारी के पास है। एक पृथक से झोपड़ीनुमा कमरे में किचन है तथा कुछ दूर पर 2-2 महिला पुरूष टायलेट (शुष्क) बना हुआ है। जो बहुत ही गंदा है। इस गेस्ट हाऊस का नाम 000000 0000 000 हैं इसके एक तरफ समय मौसम अनुसार विभिन्न रंग बदलने वाला पवित्र मानसरोवर झील तथा दूसरी तरफ हिमाच्छादित ओंकार मांधाता पर्वत है। जब हम बाकी यात्री अपना सामान उतार कर कमरों में व्यवस्थित कर रहे थे उतने अतरांल में ही महिला सहयात्रियों के द्वारा रसोईया के सहयोग से ‘‘मैगी‘‘ तैयार कर लिया गया। यात्रीगण ‘‘मैगी‘‘ खाए मैं केवल चाय पिया।

Photobucketपश्चात लगभग 2.00 बजे यात्रीगण मानसरोवर स्नान करने जाने की तैयारी करने लगे। हम लोग (राजनारायण, विक्रम, राकेश) भी मानसरोवर में स्नान करने हेतु गेस्ट हाऊस से बाहर निकलकर झील के किनारे-किनारे लगभग 1 कि.मी. जाकर एक स्थान पर रूक गए। तेज ठण्डी हवा चल रही थी, धूप भी तेज था, सभी एक-एक कर नहाने हेतु पानी में जा रहे थे। मैं भी पहली बार ‘‘मानसरोवर‘‘ में स्नान किया, मानसरोवर का पानी एकदम साफ, अत्यधिक ठण्डा हैं पानी में कमर तक गहराई में जाने पर भी नीचे सतह स्पष्ट दिखाई दे रहा था। पानी ठण्डा होने के बाद भी मानसरोवर में डुबकी लगाने पर असीम आनन्द की अनुभूति हुई कल सूर्यग्रहण पड़ा था इसलिए आज जनेऊ बदला। स्नान के दरम्यान देवी-देवता तथा सद्गुरू एवं पुरखों की याद आई। मानसरोवर में स्नान करते समय एक तरफ दूर में दिखाई दे रहे ‘‘कैलाश‘‘ तथा दूसरी तरफ ओर मांधाता पर्वत के दर्शन किया। मानसरोवर में स्नानकर अद्भुत अनुभूति प्राप्त गेस्ट हाऊस लौटे।

आज शाम को गुजरात के हमारे सहयात्रियों द्वारा भेल तैयार किया गया सभी यात्री आनन्द से चट्पटा भेल खाए किन्तु प्याज डाले जाने के कारण मैं नही खाया केवल नमकीन सेव खाया। शाम होने पर मानसरोवर किनारे खड़ा होकर सूर्यास्त देखा एवं कैलाश दर्शन किया। यहां भी जनरेटर से दो घंटे के लिए प्रकाश व्यवस्था किया गया, रात्रि के भोजन में चावल, सब्जी रोटी एव खाखड़ा तैयार किया गया सभी यात्री भोजन कर विश्राम किए। रात में मानसरोवर के किनारे बने गेस्ट हाऊस में हम 24 यात्री लगभग 10 सहयोगी सहित पास ही बने गोम्फा में निवासरत 16 लामा सहित कुल लगभग 50 लोग ही थे।

क्रमश: .....

डी.पी.तिवारी,
रायपुर


1 comment:

  1. बहुत बढ़िया यात्रा वृतांत प्रस्तुत किया है . आभार.

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