चौबीसवें दिन की यात्रा धारचुला के लिए रवाना : 11.08.2008

11.08.2008 श्रावण सुदी 10 सोमवार


Photobucketकल रात को हुई चर्चा एवं निर्देंश अनुसार प्रायः सभी यात्री रात 3.00 बजे उठ गए, चाय डोम में ही लाकर दिया गया। नित्य क्रिया से निवृत हो तैयार हुए। पैदल वाले यात्री 4.00 बजे रवाना भी हो गए। चूंकि मैं यात्रा के लिए घोड़ा लिया था इसलिए अन्य घोड़े वाले यात्रियों के साथ रवाना हुआ। बुधी से आगे का रास्ता काफी सकरा खतरनाक घाटी एवं तेज बहाव वाले झरनायुक्त है। इसलिए सावधानी पूर्वक धीरे-धीरे हम लोग आगे बढ़ते गए। लगभग 2.30 से 3 घंटे चलने के बाद हम लोग कुछ समतल मैदान जैसे भू-भाग में पहंुचे यह मालपा कैम्प है। कुमाऊ मंडल विकास निगम द्वारा यात्रियों के लिए यहां एक छोटे से होटल में चाय-नाश्ता का इंतजाम किया गया था, ंसभी यात्री यहां पहुंचकर नाश्ता के साथ-साथ थोड़ा विश्राम कर रहे थे। हम लोग भी वहां पर रूके नाश्ता में छोले-पराठा एवं अचार दिया गया। नाश्ता करने के आधा घंटा रूकने के पश्चात पुनः यात्रा में आगे बढ़े। मालपा में 1998 में हुई दुर्घटना में मृत यात्रियों के याद में स्मारक बनाया गया है। वही से पार कर आगे बढ़े। आगे का रास्ता पथरीला, पहाड़ी सकरा होने के कारण पैदल ही बढ़े। रास्त में दाहिनी तरफ पहाड़ी जिसके ऊपर से स्थान-स्थान पर झरने गिर रहे थे, तथा बांयी ओर काफी नीचे (300-400 फीट) पहाड़ी काली नदी तेज रफ्तार से बह रही थी, पहाड़ी के ऊपर झरने के पानी गिरने से पगडण्डी फिसलनयुक्त हो गया है। अत्यन्त सावधानी पूर्वक धीरे-धीरे चलते हुए हम लोग आगे पैदल ही बढ़ें जा रहे हैं लगभग 10.00 बजे हम लोग लखनपुर पहुंचे। यहां पर थोड़ा विश्राम किए। यहां से दो रास्ता हो जाता है एक रास्ता पहाड़ी के ऊपर से होते हुए गाला जाता है, इसी रास्ते से हम लोग कैलाश मानसरोवर परिक्रमा के लिए जाते हुए आए थे, तथा दूसरा रास्ता पहाड़ी से नीचे नदी की ओर उतर कर नदी के किनारे-किनारे ही सीधा मंगती जाता है। चूंकि आज हमें सीधा मंगती जाकर वहां से धारचुला तक जाना है इसलिए लखनपुर से हम लोग पहाड़ी रास्ते से सावधानीपूर्वक नदी की ओर नीचे पैदल ही उतरे तत्पश्चात नदी के किनारे-किनारे ही कुछ दूर पैदल एवं कुछ दूर घोड़े से यात्रा करते हुए बढ़ते रहे। इसी प्रकार लगभग एक डेढ़ घंटा चलने के बाद मंगती पहुंचा मेरे से पहले 3-4 और यात्री वहां पहंुच गये थे, यात्रा में जाते समय हम यात्रियों को मंगती से ही पोनी एवं पोर्टर उपलब्ध कराया गया था। वापसी में भी वे यही तक के लिए ही थे। क्योंकि आगे सड़क मार्ग से बस द्वारा धारचूला पहुचना है ंइसलिए कुमाऊ मण्डल विकास निगम द्वारा निर्धारित दर के अनुसार पोनी को रूपये 2970.00 (3100.00) तथा पोर्टर को रूपये 2574.00 (2700.00) यहीं भुगतान कर विदा किया।

Photobucketयात्रियों के लिए दोपहर का भोजन निगम के द्वारा धारचुला से ही मंगाया गया था जो थोड़ी देर में ही पहंुच गया। उन्हीं के द्वारा जानकारी दी गई कि धारचुला रास्ते मे चट्टान गिरने से रास्ता बंद हो गया जिसके कारण निगम की बस मंगती तक नहीं आ पाएगी अतः जैसे ही हम लोग भोजन कर लेगें जीप द्वारा रवाना होगें। हमारे भोजन करते तक कुछ और यात्री आ गए थे। इस प्रकार हम लोग 20-22 लोग हो गए थे। जल्दी से भोजन कर दो जीप से धारचुला के लिए रवाना हुए। जीप द्वारा लगभग 7-8 कि.मी. यात्रा तय करने के बाद रूक गए, क्योकि आगे सड़क पर चट्टान गिरने की वजह से आना जाना अवरूद्ध था। जीप से हम लोग उतर कर अवरूद्ध चट्टान युक्त रास्ते को सावधानीपूर्वक पैदल पार किए। चूंकि पोर्टर को मंगती में ही छोड़ दिए थे। इसलिए जो बैग पोर्टर के द्वारा ढ़ोया जाता रहा उस बैग को अब हम लोग स्वयं लेकर उक्त रास्ता पार किये। यद्यपि बैग में सामान नही के बराबर था किन्तु उसमें मानसरोवर के जल वाला जरीकेन एवं बाॅटल रखा हुआ था इसलिए कुछ वजनी था। कुछ दूर पैदल जाकर रूक गए, यही पर धारचुला से आने वाली बस का इंतजार किए। थोड़ी देर बाद कुमाऊ मंडल विकास निगम की बस आई जिसमें हम लगभग 20-22 यात्री सवार होकर धारचुला दोपहर 2.30 बजे पहुंचे, ठीक उसी गेस्ट हाऊस में रूके जहां पर यात्रा में जाते समय रूके थे। धूप अच्छी तेज थी थकावट भी था इसलिए यहां गेस्ट हाऊस में मैं स्नान किया। 3.30 बजे विक्रम, राकेश (दिल्ली) व मैं सामने नेपाल वाले दारचुला (1 कि.मी.) पैदल पुल पार कर गए, वहां के बाजार घूमकर हम लोग 5.00 बजे वापस आए तत्पश्चात पी.सी.ओ. में जाकर घर बात किया। 6.00 बजे तक शेष सभी यात्रीगण भी आ गए तथा हमारा कामन लगेज भी आ गया। आगामी दो दिन की यात्रा भी बस से करनी है तथा लगेज भी दो दिन बाद ही मिलेगी इसलिए दो दिन का सामान एवं बस में सफर के लायक कपड़े निकाला व सामान पुनः पैक किया। शाम को सूप लिया। गेस्ट हाऊस के काऊंटर से ‘‘कैलाश‘‘ एवं ‘‘ओम पर्वत‘‘ के फोटोग्राफ्स खरीदा। आगे यात्रा के अनुसार सभी यात्री अपना-अपना सामान पुनः पैक किए। रात्रि के भोजन में चांवल, दाल, रोटी और दो सब्जी तथा सेवई (मीठा) दिया गया। भोजन के दौरान ही हमें बता दिया गया कि सभी यात्री अपना-अपना सामान रात्रि 10.00 बजे तक गेस्ट हाऊस के काऊण्टर के पास पहुंचा देवे ताकि सामान रात में ही बस में लदवा दिया जाएगा, तथा कल की यात्रा काफी लंबी है, इसलिए सुबह यात्री जल्दी तैयार हो जाए बस 5.00 बजे यहां से रवाना होगी। निर्देशानुसार भोजन के बाद हम सभी यात्री अपना-अपना सामान कांऊण्टर के पास पहुंचा दिए फिर सोने की तैयारी किए।


क्रमश: .....

डी.पी.तिवारी
रायपुर

1 comment:

  1. तिवारी जी-नमस्कार

    इस पोस्ट में पीछे का वर्णन है
    शायद गलती से यहां पर लग गयी है।
    संजीव तिवारी जी से कहें कि इसे
    यथा स्थान पर लगा दें।

    आज हम इस यात्रा वृत्तांत को ही पढ रहे हैं।
    आपने अच्छा लिखा है,लगभग सभी विवरण आ गए

    आभार

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