06.08.2008 श्रावण सुदी 5 बुधवार

प्रातः 6 बजे उठा, नित्यक्रिया से निवृत हो चाय पिया। सभी यात्री हम लोग रवाना होने की तैयारी किए, सामान पैक किए। लगभग 8.00 बजे दरचन से ग्रुप ‘‘बी‘‘ के यात्रीगण कैलाश परिक्रमा पूर्ण कर बस द्वारा कीहू आए। ग्रुप ‘‘ए‘‘ के हम सब यात्री अपना-अपना समान इसी बस में लदवाकर बस में बैठे एवं ‘‘ओम नमः शिवाय‘‘ के उद्घोष के बाद तकलाकोट के लिए रवाना हुए। बस में बैठे-बैठे हम सभी यात्री एक-दूसरे को अपने-अपने यात्रा अनुभव सुनते-सुनाते रहे। 9.30 बजे हमारी बस राक्षसताल के पास पहुंची बस यहां पर आधा घंटा रूकी रही इस बीच कुछ यात्री राक्षसताल के पास जाकर जल भर ले आए। उसके पश्चात पुनः रवाना हुए। 11.30 बजे बस तकलाकोट सीमा के बाहर स्थित ‘‘शहीद जोरावरसिंह‘‘ के समाधि के पास रूकी। बताया गया कि 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान भारतीय जवान श्री जोरावरसिंह इसी स्थल पर शहीद हो गए थे। कुछ देर रूकने के बाद बस तकलाकोट शहर के भीतर मार्गों से होते हुए गेस्ट हाऊस ग्राउंड (पुरंग) पहुंच गई। बस से सामान उतारकर गेस्ट हाऊस के ग्राउंड फ्लोर में ही अपना सामान मैं व श्री राजनारायण मस्करा एक कमरे में रखे विगत दो दिन से नहाया नही था, इसलिए पहले स्नान किया आज लंच में केवल टोमेटो सूप दिया गया साथ में ही ग्रुप ‘‘बी‘‘ के द्वारा दरचन से लाया गया उबला चना एवं हलवा लगाया गया था जिसे सभी यात्री दोपहर में खाए। शाम को 4.00 बजे बाजार घूमने गए एवं वही से घर पर फोन द्वारा जानकारी दिया कि मैंने कैलाश एवं मानसरोवर परिक्रमा सकुशल पूर्ण कर ली है। शाम 6.00 बजे (चीनी समय 8.30 बजे) डिनर का बुलावा आया, डिनर में चांवल और आलू खाया। रात में हल्का हरारत महसूस किया तो क्रोसीन टेबलेट खाकर सोया।
क्रमश: .....
डी.पी.तिवारी
रायपुर
Thank you for sharing such detailed information.
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